Ghazal

Boy-

ये दिलकश समा

हैं हमतुम यहाँ

झुकी सी नज़र

पिघलती शमा

हो क्यूँ फ़ासले

भला दर्मियाँ

समझ लो सनम

नयन की ज़ुबान

रुमानी मौसम

का ले लें मजा

मिटा दें सनम

हैं जो दूरियाँ

कहाँ है तेरी

वो कुर्बत वफ़ा

तेरी वो हलफ

वो तेरी रजा

मचलती नफस

वो तेरा वादा

हूँ मदहोश मैं

एक तेरे बिना

Girl-

तू भँवरा छली

मैं खिलती सबा

दिखता है पर

नहीं तू भला

शरारत न कर

मुझे मत बना

हाँ माना तू है

एक मुझपे फिदा

नज़र से मेरी

तू हो जा दफ़ा

तू बनता होगा

नहीं तू मेरा

कभी बन सका

न मेरी वफ़ा

मैं कमसिन बला

तु है मनचला

न सोचो ये तुम

नहीं है पता

मेरा वो होगा

कुछ हटके ज़रा

मंजरी ‘पुष्प’