Ghazal

आपके प्यार में दिल दिवाना हुआ

इस गली में तेरा जब से आना हुआ

सोजे उल्फत की राहों में गुमनाम था

अब तो महफ़ूज़ उसका ठिकाना हुआ

तुम मिले हमनबां तो लगा यूँ हमें

पंछियों का नए सुर में गाना हुआ

जो घंटा मेह बन के बरसता न था

बे मौसम बारिशों का जमाना हुआ

फ़र्ज़ इतना जो मुझपे इनायत करम

सर इबादत में उसके झुकाना हुआ

मेरा कुछ भी नहीं मुझमें बाक़ी रहा

मेरा अब तो सभी कुछ तुम्हारा हुआ