जब उसने बाज़ी पलट दी

शैलेन्द्र छरहरा, लम्बा, सुन्दर और सजीला नौजवान था. शैलेन्द्र स्वभाव से दिलफेक था। उसकी ज़िन्दगी में कई लड़कियां आयीं और गयीं. वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय था और उसके हज़ारों की संख्या में मित्र तथा फॉलोवर्स थे जिनमे लड़कियों की संख्या लड़कों की अपेक्षा ज़्यादा थी.

एक बार फेसबुक पर उसने एक बहुत खूबसूरत लड़की का प्रोफाइल देखा. लड़की का नाम था स्नेहलता. शैलेन्द्र ने उसे मित्र अनुरोध भेजने में ज़रा भी देरी न की.स्नेहलता ने जब अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर शैलेन्द्र का मित्र अनुरोध देखा तो उसे शैलेन्द्र के बारे में और जानकारी हांसिल करने की उत्सुकता हुई. शाम को कॉफी की चुस्कियों के साथ वह बड़े गौर से शैलेन्द्र की प्रोफाइल देखती रही. शैलेन्द्र की प्रोफाइल ने उसे काफी प्रभावित किया और उसने उसका मित्र अनुरोध स्वीकार कर लिया.

उस दिन से दोनों की गुफ्तगू का सिलसिला शुरू हो गया. वे दोनों मैसेंजर और व्हाट्सअप पर देर रात तक चैट करते.कुछ दिनों चैट करने के उपरांत शैलेन्द्र को स्नेहलता से मिलने की बड़ी उत्सुकता हुई.

शैलेन्द्र-कल मैं तुम्हे कापुचीनो ब्लास्ट में कॉफ़ी पिने केलिए आमंत्रित करना चाहता हूँ.

स्नेहलता-कल कुछ निजी व्यस्तता है; दरअसल पिताजी शहर से बाहर हैं और माँ के दाँतों में तकलीफ है. उन्हें कल डॉक्टर को दिखाना है. परसों शाम मैं खाली हूँ.

शैलेन्द्र-और तुम्हारे लिए तो मैं हमेशा खाली हूँ!

निर्धारित दिन और समय पर शैलेन्द्र कापुचीनो ब्लास्ट समय से पहुंच गया. कुछ देर के इंतज़ार के बाद उसे दूर से स्नेहलता आती हुई दिखाई दी. शैलेन्द्र ने पाया की स्नेहलता बेहद छोटे कद की थी. कुछ ही क्षण में वो उसके पास आकर खड़ी हो गयी. हल्की ऊँची सैंडल के सहारे वह मुश्किल से शैलेन्द्र के कंधे के बराबर पहुँच पा रही थी.

स्नेहलता का रंग भी कुछ-कुछ सांवला सा था. उसने शैलेन्द्र से हाथ मिलाने के लिए अपना हाँथ आगे बढ़ाया

तो शैलेन्द्र ने अपना हाँथ पीछे करते हुए कहा- अगर मैं अपना इरादा बदल दूँ तो?

स्नेहलता कुछ क्षण के लिए मौन रही फिर बोली- तो मैं इसे तुम्हारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल मानूंगी. ऐसा कहते वक़्त स्नेहलता के श्यामल चेहरे पर गज़ब का आत्मविश्वास था.उसमे लज्जा या हीन भावना का नामोनिशान न था, था तो बस अपने ऊपर अटूट भरोसा जो उसके चेहरे की आभा और व्यक्तित्व कि गरिमा बढ़ा रहा था.

शैलेन्द्र काफी प्रभावित हुआ.उसने स्थिति को संभालते हुए कहा-अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था. चलो बताओ क्‍या लेना पसंद करोगी.

यह कहानी कहीं न कहीं यह सच्चाई बयां करती है कि जीवन में आत्मविश्वास ही सफलता कि कुंजी है. स्नेहलता के दृढ विश्वास ने आज बाज़ी उसके हक़ में पलट दी थी. स्नेहलता जैसी लड़कियां बाकी लड़कियों के लिए एक मिसाल है कि परिस्थितियां और हालात जैसे भी हों, हमारा मनोबल कभी टूटना नहीं चाहिए.