Ghazal

Boy-

जाते हो ये बता दो

किस नाम पुकारूँ

हक़ जो दे दो मुझको

मैं चाँद पुकारूँ

सच्चा हूँ मैं आशिक

दिल थाम पुकारूँ

खिलती सी सुबह से

फिर शाम पुकारूँ

Girl-

तुमको मैं भी जाना

किस काम पुकारूँ

उलफत में जीता

नाकाम पुकारूँ

राधा मैं हूँ तुमको

क्या श्याम पुकारूँ

खिलती सी सुबह से

फिर शाम पुकारूँ

Boy-

जाते हो ये बता दो

किस नाम पुकारूँ

हक़ जो दे दो मुझको

मैं चाँद पुकारूँ

सच्चा हूँ मैं आशिक

दिल थाम पुकारूँ

खिलती सी सुबह से

फिर शाम पुकारूँ

Girl-

तुमको मैं भी जाना

किस काम पुकारूँ

उलफत में जीता

नाकाम पुकारूँ

राधा मैं हूँ तुमको

क्या श्याम पुकारूँ

खिलती सी सुबह से

फिर शाम पुकारूँ

Ghazal

थी चाँदनी में शब धुली

था चाँद भी शबाब पर

महफ़िल सजी थी तारों की

धुंधले से आसमान पर

मेरी नज़र लगी रही

थी चाँद पर किताब पर

उनकी मचलती याद थी

इस जज़्बाए कलाम पर

यूँ टकटकी लगी रही

आई न नींद रात भर

कोई न ज़ोर चल सका

एहसासों के तूफ़ान पर

तुम्हें सुनाएँ हाले दिल

आके मिलो जो बाम पर

मंजरी ‘पुष्प’