ग़ज़ल

टक्कर हुई सड़क पे तो

दिल के वो तार हिल गए

दरिया में थे बुझे पड़े

कँवल वो सारे खिल गए

बदले जो रंग नूर के

ख़तों के सिलसिले चल गए

बदल गए मिज़ाजे मन

लहजे पूरे बदल गए

धड़कन में उनकी बस गए

वो दिल में ढल गए