वो तारों वाली रात

तुम नहीं थे

फिर तुम यहीं थे

तुमसे रात पहर होती रही बात

याद आती है मुझको वो तारों रात

चाँद नहीं था

पर चाँद कहीं था

स्याह आसमाँ और तारों की बिसात

याद आती है मुझको वो तारों वाली रात

जगमगाते झिलमिल करते सितारे

टूटते गिरते सितारे

रात भर तारों की होती रही बरसात

याद आती है मुझको वो तारों वाली रात

हवा झूमती, चूमती

बेशुमार तारों की गिनती

हर घड़ी चलता रहा हिसाब

याद आती है मुझको वो तारों वाली रात

डोलते मंजर

बोलते झींगुर

स्याह अंबर और खुला छत

याद आती है मुझको वो तारों वाली रात

रात बड़ी

नींद उड़ी-उड़ी

नींद के लग गए पाँख

याद आती है मुझको वो तारों वाली रात

वो दो आँखें भी तो तारा हैं

जाने क्या करती इशारा हैं

जाने क्या है इनकी दरख्वास्त

याद आती है मुझको वो तारों वाली रात

पवन डोले साँय-साँय

मेरे कानों में आकर फुसफुसाएँ

सन्नाटों से आती रही आवाज़

याद आती है……………….रात

बचपन की नींद से दोस्ती हैं

जवानी मुझे कोसती है

माँ आ कर सर पर फेर दे हाथ

याद………..रात

जमाना मुझपर हँसता है

पर मेरा प्यार सच्चा है

यह कम-जर्फ जमाना छोड़ दे दो मेरा साथ

याद आती है…………….

ग़ज़ल

चली है झूमती पवन ज़रा चहक उठा है मन

ठहर लुभावनी घड़ी में धुन मैं गुनगुना तो लूँ

लो गा रही हैं कोयलें सुना रही नफ़्स नफस

लो सुर में सुर मिला के आज सुन मैं गुनगुना तो लूँ

है याद आ रहा कोई अब उसकी आरज़ू सजा

ये प्यास से भरे नयन को मुन मैं गुनगुना तो लूँ

मुझे तो लग गए हैं पंख छू लूँ ज़मीन आसमाँ

हज़ार से हसीन ख़्वाब बुन मैं गुनगुना तो लूँ

ये पल अगर गुज़र गया तो लौट कर न आएगा

अभी मिला मुझे जो पल को चुन मैं गुनगुना तो लूँ

ग़ज़ल

ये न पूछ तक़दीर में क्या लिखा है

जो मिला बड़े मतलब से मिला है

हमने ताउम्र ख़ैरात बाँटी है

हमसे हर शख़्स मक्सद से मिला है

हमें इसका न कोई रंज-ओ-गिला

जो मिला रब की नेमत से मिला है

उसकी आरजू क्या जो औरों को हासिल

क्या पल पल की शिकायत से मिला है

हमें वो मिला जिसके हम थे क़ाबिल

ये मत पूछ क्या मिला न मिला है

ये कोई करिश्मा या दुआ का असर

फर्द औरों से बेहतर ही मिला है

ग़ज़ल

महफ़िल में ले के नाम मेरा सनम

सबसे कह दो तेरा मैं भी वरना नहीं

तक़दीरों में मैं हूँ लकीरों में तेरी

वरना मोहब्बत मुझको अब करना नहीं

दुनिया क्या कहती है क्या कहेगी भला

दुश्मन इस दुनिया से हमें डरना नहीं

मुजरिम न बन जाऊँ निगाहों में तेरी

ला हासिल इन चक्करों में पड़ना नहीं

लड लड के मैं खुद से भी अब थकने लगा

बेकार में तुमसे मुझे लड़ना नहीं

माला जो बाहों की तुम पहना दो ज़रा

ग़ैरों की बाहों में मुझे मरना नहीं